
x
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने अलगाववादी उग्रवादियों के खिलाफ सैन्य अभियान तेज कर दिया है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक खारान जिले के लज्जे क्षेत्र में बड़ी संख्या में जमीनी सैनिक तैनात किए गए हैं। अभियान में लड़ाकू हेलीकॉप्टरों और सैन्य ड्रोन का भी इस्तेमाल किए जाने की खबर है। लगातार जारी सैन्य गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि अभियान के दौरान किए गए एक ड्रोन हमले में सुल्तान मोहम्मद नाम के किसान की मौत हो गई। वह हाजी मलिक उस्मान सासोली का बेटा बताया गया है। कुछ अन्य नागरिकों के घायल होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, दुर्गम क्षेत्र में संचार सेवाएं प्रभावित होने के कारण नागरिक हताहतों और संपत्ति को हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी किसान की कथित मौत पर तत्काल विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
सुरक्षा बलों ने सात उग्रवादियों को मारने का किया दावा
पाकिस्तानी सरकारी मीडिया और सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार खारान के लज्जे इलाके में खुफिया सूचना के आधार पर ऑपरेशन चलाया गया। इसे कथित रूप से ‘ऑपरेशन रद-उल-फितना 3’ का हिस्सा बताया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई में कम से कम सात उग्रवादी मारे गए और उनके कई ठिकानों को नष्ट कर दिया गया।
सुरक्षा बलों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य प्रतिबंधित अलगाववादी संगठनों के सदस्यों और उनके ठिकानों को निशाना बनाना है। इसके विपरीत स्थानीय समूहों का आरोप है कि सैन्य कार्रवाई की चपेट में ग्रामीण, किसान और चरवाहे भी आ रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सैन्य कार्रवाई केवल खारान तक सीमित नहीं बताई जा रही। बलूचिस्तान के कई संवेदनशील जिलों में सुरक्षा बल तलाशी, निगरानी और खुफिया अभियानों को आगे बढ़ा रहे हैं। अगस्त में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और उग्रवादी संगठनों के बीच कई मुठभेड़ें सामने आई हैं। हाल में पाकिस्तान की सेना ने प्रांत में अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान कई उग्रवादियों को मारने का दावा किया था।
बीएलए के हमलों से बढ़ा तनाव
प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने अगस्त के पहले पखवाड़े में सैन्य काफिलों, सुरक्षा चौकियों और सरकारी बुनियादी ढांचे पर कई हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। संगठन का कहना है कि उसकी कार्रवाइयों में 30 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। पाकिस्तानी प्रशासन ने इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है।
बलूचिस्तान में एक प्रमुख गैस पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाए जाने से क्वेटा सहित कई जिलों में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की खबर भी सामने आई। बीएलए की ओर से ‘ब्लैक डे’ और आर्थिक नाकाबंदी के आह्वान के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है, जबकि कुछ स्थानों पर इंटरनेट और संचार सेवाएं प्रभावित बताई जा रही हैं।
बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी हिंसा का सामना कर रहा है। पाकिस्तान सरकार उग्रवादी संगठनों पर सुरक्षा बलों, आम नागरिकों, सरकारी प्रतिष्ठानों और चीन से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाती है। वहीं, बलूच संगठनों का कहना है कि उनका संघर्ष राजनीतिक अधिकारों, संसाधनों में हिस्सेदारी और स्वायत्तता से जुड़ा है।
लापता लोगों के मुद्दे पर प्रदर्शन
सशस्त्र संघर्ष के साथ बलूचिस्तान में नागरिक अधिकार संगठनों का आंदोलन भी जारी है। बलूच एकजुटता समिति यानी BYC से जुड़े कार्यकर्ता लापता लोगों का पता लगाने, कथित गैरकानूनी हिरासतों को रोकने और सैन्य अभियानों में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
इन आंदोलनों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और गिरफ्तारियों के आरोपों ने केंद्र सरकार तथा स्थानीय आबादी के बीच अविश्वास को और गहरा किया है। मौजूदा परिस्थितियों में खारान का अभियान बलूचिस्तान के सुरक्षा संकट के साथ मानवीय चिंताओं को भी दोबारा सामने ले आया है।
TagsKharanPak Armyactioncivilianinjuredखारानपाक सेनाकार्रवाईनागरिकघायलजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





